ब्रह्मसूत्र उपनिषदों की शिक्षा का संक्षिप्त सार है.



वेद का एक भाग होने से उपनिषदों का सम्बन्ध श्रुति या प्रकट हुए साहित्य से है. ये सनातन कालातीत हैं. अन्त:प्रेरित ऋषि यह घोषणा करते हैं कि जिस ज्ञान को वे प्रदान कर रहे हैं उसका उन्होंने स्वयं आविष्कार नहीं किया है. वह उनके आगे बिना उनके प्रयत्न के प्रकट हुआ है (पुरुष प्रयत्नं विना प्रकटीभूत). उपनिषद् प्रतीक शैली का प्रयोग करते हुए, दिव्य दर्शन को हमारे ऊपर छोड़ा गया ईश्वर का निश्वास कहते हैं (मुण्डक 2-1-6). श्वेताश्वतर उपनिषद् कहती है कि ऋषि श्वेताश्वतर ने अपने तप के प्रभाव और ईश्वर की कृपा से सत्य का दर्शन किया. उपनिषदें व्यवस्थित चिन्तन से अधिक आत्मिक आलोक की साधन हैं. इनमें हमें आध्यात्मिक जीवन का वर्णन मिलता है, जो भूत, वर्तमान और भविष्य में सदा एक सा है. ब्रह्मसूत्र उपनिषदों की शिक्षा का संक्षिप्त सार है. वेदान्त के महान आचार्यों ने इस ग्रन्थ पर भाष्य रचकर उनसे अपने-अपने विशिष्ट मत विकसित किये हैं.

 
 
श्री सुशील कुमार रचित गौरवशाली भारत (साहित्‍य सेवा सदन, निराला नगर, रायबरेली द्वारा प्रकाशित) पुस्‍तक से उद्धृत Excerpt from the book 'Gauravshali Bharat' written by Sushil Kumar Srivastava & published by 'Sahitya Sewa Sadan', Nirala Nagar, Rae Bareli

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